भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए टॉयलेट की साफ-सफाई और स्वच्छता एक बड़ी चुनौती रही है। लंबे समय से यात्रियों को सफर के दौरान गंदे टॉयलेट्स की समस्या का सामना करना पड़ता था, जिससे सफर की सुविधा और आराम दोनों प्रभावित होते थे।
रेलवे ने अब हाईटेक स्वचालित एवं जेट क्लीनिंग मशीनों के जरिए सफाई का काम आसान, तेज और बेहतर बनाया है।
रेलवे टॉयलेट समस्या समाधान योजना: क्लीन ट्रेन स्टेशन (CTS) और नई तकनीक
रेलवे की यह योजना मुख्यतः सफाई की गुणवत्ता सुधारने, सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने और नया स्वचालित टॉयलेट साफ करने वाला जुगाड़ अपनाने पर केंद्रित है। इस योजना का उद्देश्य सभी जनरल और आरक्षित कोचों में सफाई और टॉयलेट्स की स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
नई तकनीक में बैटरी से चलने वाली जेट क्लीनिंग मशीनों का उपयोग होता है जो पानी और लिक्विड साबुन के मिश्रण से टॉयलेट्स को कुछ ही सेकंड में साफ कर देती हैं। इस तकनीक को रेलवे ने देश के 20 प्रमुख स्टेशनों पर शुरू किया है, जिसमें सफाईकर्मी मिलकर 4 टॉयलेट्स को जल्दी से साफ करते हैं। साफ-सफाई की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए रेलमदद ऐप और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
यहाँ नीचे रेलवे टॉयलेट समस्या समाधान योजना की मुख्य विशेषताओं का सारांश दिया गया है:
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| बिंदु | विवरण |
| योजना का नाम | क्लीन ट्रेन स्टेशन योजना (CTS) |
| लागू क्षेत्र | जनरल और आरक्षित कोच, प्रमुख रेलवे स्टेशन |
| सफाई तकनीक | हाईटेक जेट क्लीनिंग मशीन, स्वचालित सिस्टम |
| सफाई में लगने वाला समय | पहले 7-10 मिनट, अब 56 सेकंड |
| सफाई कर्मियों की ड्यूटी | दो कर्मी मिलकर चार टॉयलेट्स की सफाई |
| शिकायत दर्ज करने का तरीका | रेलमदद ऐप, हेल्पलाइन नंबर, वेबसाइट |
| योजना का लाभ | तेज सफाई, स्वच्छता, यात्रा में सुविधा |
| लागत | पारंपरिक टॉयलेट्स के बराबर या उससे कम |
स्वच्छता के लिए नई व्यवस्थाएं और यात्रियों के लिए फायदे
- सफाई में इंसानी काम पर निर्भरता कम हुई है, जिससे सफाई की गुणवत्ता बेहतर हुई है।
- सफाईकर्मी बैटरी से चलने वाली मशीनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सफाई का समय बहुत कम हो गया है।
- यात्रियों को सफर के दौरान सफाई की शिकायत रेलमदद ऐप, वेबसाइट या हेल्पलाइन पर कर सकते हैं।
- 2026 के अंत तक इस योजना को पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य है।
- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सफाई में विशेष सुविधाएं मिलेंगी।
- सफाई प्रक्रिया में पानी और लिक्विड साबुन का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
यात्रियों की भूमिका और सफाई शिकायत कैसे करें
- सफर के दौरान यदि टॉयलेट गंदा मिले तो तुरंत रेलमदद ऐप, हेल्पलाइन नंबर 139 या 138 पर शिकायत दर्ज करें।
- ट्रेन के स्टाफ या सफाई कर्मियों को भी गंदगी की जानकारी देनी चाहिए ताकि त्वरित सफाई हो सके।
- यात्रियों को सफाई व्यवस्था में सहयोग करने की भी अपील की जाती है।
इस योजना की वास्तविकता और सरकार की योजना
रेलवे मंत्रालय ने इस सफाई योजना को धीरे-धीरे पूरे देश के प्रमुख स्टेशनों तक बढ़ाने की योजना बनाई है। इस तकनीक का राष्ट्रीय स्तर पर रोल आउट हो चुका है और इसे 2026 के अंत तक देशभर में पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य है। रेलवे ने सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण भी दिया है।
सरकारी स्रोतों के अनुसार यह योजना पूरी तरह सच है और इसे यात्रियों की सुविधा व स्वच्छता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम माना जा रहा है। इससे पहले सफाई में लगने वाले समय को कम करने के साथ-साथ सफाई की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। सफाई शिकायत के लिए रेलमदद ऐप और हेल्पलाइन नंबर भी एक तार्किक और त्वरित समाधान उपलब्ध कराते हैं।










