बैंक खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज होना आज के समय में बहुत जरूरी हो गया है। नॉमिनी वह व्यक्ति होता है जो आपके बाद आपके बैंक खाते की जमा राशि या अन्य वित्तीय संपत्ति पाने का अधिकारी होता है।
पहले खाताधारक सिर्फ एक नॉमिनी नामित कर पाता था, लेकिन नए नियमों के तहत अब एक से ज्यादा नॉमिनी जोड़े जा सकेंगे और हर नॉमिनी के हिस्से प्रतिशत में तय किए जा सकेंगे।
Bank Nominee Rules 2025
भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 नवंबर 2025 से बैंक खातों में नॉमिनी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रत्येक बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और बैंक लॉकर में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही खाताधारक यह निर्धारित कर सकता है कि हर नॉमिनी को कुल धनराशि का कितना प्रतिशत मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर आपके खाते में ₹1 लाख जमा है और आपने चार नॉमिनी बनाए हैं, तो आप तय कर सकते हैं कि पहले नॉमिनी को 60%, दूसरे को 10%, तीसरे को 10% और चौथे को 20% हिस्सा मिले।
इस नियम के तहत अगर कोई ग्राहक नॉमिनी जोड़ना या बदलना चाहता है तो बैंक को तीन कार्यदिवस के भीतर उसकी आवेदन रसीद जारी करनी होगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित होगी। यह व्यवस्था डिजिटल माध्यमों से पूरी होती है और हर तरह के बैंक उत्पादों पर समान रूप से लागू होती है।
अब नॉमिनी की जानकारी पूर्णतया डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की जाएगी, जिससे बैंक और ग्राहकों दोनों के लिए विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इसमें बैंक खाते के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट या लॉकर्स की सभी नॉमिनी जानकारी साफ और स्पष्ट दिखाई देगी।
प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
नए नियमों के तहत, जब आप बैंक खाते में नॉमिनी जोड़ते हैं, तो आपको नॉमिनी का नाम, पता, जन्मतिथि और आपके नॉमिनी के साथ संबंध की जानकारी देनी होती है। इसके अलावा बैंक द्वारा आवश्यक अन्य दस्तावेज भी जमा करना पड़ सकता है।
अगर आप नॉमिनी बदलना या हटाना चाहते हैं तो बैंक को आवेदन देना जरूरी होगा। बैंक को आवेदन मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर आपको उसकी प्राप्ति की रसीद देनी होती है। यह नया नियम नॉमिनी से जुड़े झंझटों को कम करता है और सहूलियत बढ़ाता है।
आरबीआई ने विशेष तौर पर यह भी कहा है कि अगर कोई ग्राहक नॉमिनी नहीं जोड़ना चाहता है, तब भी बैंक को ग्राहक को जानकारी देना आवश्यक है और उसे ये विकल्प देना चाहिए कि वह फॉर्म भरकर निर्गत करे कि उसने नॉमिनी नहीं बनाया है।
अधिकार और नियमों की खास बातें
नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नॉमिनी कानूनी रूप से पैसे का मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी होता है। इसका मतलब यह है कि नॉमिनी को प्राप्त राशि का वितरण सही कानूनी वारिस को करना होगा। अगर नॉमिनी और वसीयत में नामित व्यक्ति अलग-अलग हैं, तो वसीयत को प्राथमिकता दी जाएगी।
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इसके अतिरिक्त, यदि बैंक मृतक ग्राहक के खाते या लॉकर में जमा राशि का क्लेम 15 दिनों में भुगतान नहीं करता है, तो उसे ₹5,000 प्रति दिन जुर्माना देना पड़ सकता है। यह नियम क्लेम प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाता है।
आरबीआई ने सभी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs) को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने और नए सभी खातों में नॉमिनी नाम दर्ज करें और नॉमिनी नहीं होने पर खाताधारक को सही जानकारी दें। साथ ही बैंक नॉमिनी की जानकारी में अतिरिक्त विवरण जैसे ईमेल आईडी और फोन नंबर भी माँग सकते हैं।
क्यों आवश्यक है यह बदलाव?
पहले सिर्फ एक नॉमिनी रखने की वजह से परिवार में कई बार धन के वितरण को लेकर विवाद होते थे। इसके अलावा, नॉमिनी नामांकन और क्लेम की प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी होती थी। RBI के नए नियम इन समस्याओं को खत्म करने के लिए बनाए गए हैं।
अब खाताधारक जितने जरूरी समझे, उतने नॉमिनी रख सकता है और उनके हिस्से भी तय कर सकता है। इससे सभी संबंधितों को उनके अधिकार मिलेंगे और प्रक्रिया भी सरल और तेज होगी। डिजिटल रिकॉर्डिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।
निष्कर्ष
RBI के 2025 के नए नियम से बैंक खाते में नॉमिनी की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सरल हो गई है। अब खाताधारक अधिकतम चार नॉमिनी बना सकता है और उनका हिस्सा प्रतिशत में तय कर सकता है। इससे परिवार की वित्तीय सुरक्षा बेहतर होगी और विवादों का खतरा कम होगा। इसलिए हर बैंक ग्राहक को चाहिए कि वह अपने खाते में नॉमिनी जरूर जोड़े या अपडेट करे। यह कदम आपको और आपके परिवार को भविष्य में वित्तीय सुगमता और सुरक्षा प्रदान करेगा।










